Awara Masiha - A Vagabond Angel

एक भटकती आत्मा जिसे तलाश है सच की और प्रेम की ! मरने से पहले जी भरकर जीना चाहता हूं ! मर मर कर न तो कल जिया था, न ही कल जिऊंगा !

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ख़ामोश आँखें .......

Posted On: 30 Jan, 2017 कविता में

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तेरी आँखों की ख़ामोशीयां जैसे करती है मुझसे कुछ सवाल
इनमे छुपा  है कितना प्यार , फिर भी मांगते हो मुझसे इक़रार ………..


तेरे सूखते होठ जैसे देते है मेरी हर बात का जवाब
जब तक तुम इन्हें ना चूमोगे , यह कैसे होंगे लाज़वाब …………..


तेरे भरे हुए कपोलों की सुर्खिया , मुझे मांगती है यह
कैसा हिसाब
जब तक तुम इन्हें ना छुओगे , फिर यह कैसे रहेंगें  सुर्ख लाल …………..


तेरी लहराती जुल्फों की लटाओं को मैं
क्या दूँ जवाब
जो बिखरी है मेरे इंतजार में , बनके एक  महकता शबाब ………….


तेरे चेहरे की मुस्कान जैसे करती एक अनजाना  सा अहसान
मेरी वफ़ा को तोलने वाले , कभी तू भी तो हो मुझपर  कुर्बान ………….


तेरी आँखों का कजरारा , जिसने मुझे देखा और धिक्कारा
हे भटकने वाले मुसाफिर , क्यों
ढूंढता  है तू कोई और सहारा …………..

तेरे माथे का लश्कारा , जैसे देता है मुझे कोई आवाज़
जिसकी फीकी पड़ती चमक , जैसे कहती है अब तो कर लो मेरा आगाज़ …….

By
Kapil Kumar
Awara Masiha

Web Title : ख़ामोश आँखें .......



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