Awara Masiha - A Vagabond Angel

एक भटकती आत्मा जिसे तलाश है सच की और प्रेम की ! मरने से पहले जी भरकर जीना चाहता हूं ! मर मर कर न तो कल जिया था, न ही कल जिऊंगा !

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कड़वा सच!!

Posted On: 10 Mar, 2017 Junction Forum में

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बचपन में इक कहानी पढ़ी थी ..की इक बार इक अंग्रेज इक डॉगी पालता है … इक दिन जब अंग्रेज सुबह उठता है तो देखता है ….की उसके ड्राइंग रूम में कुछ पड़ा है …अंग्रेज को शक होता है ….की यह क्या हो सकता है ?

पहले वोह अपने डॉगी को फिर …पड़ी उस चीज को देखता है ..कुत्ते की मासूमियत उसे अपने डॉगी पर शक ना करने को मजबूर कर देती है …वोह उस चीज के पास जाता है …फिर उसे सूंघता है ..सूंघने पे उसे बदबू का अहसास होता है ….की यह तो शायद डॉगी का फूफ फू है …..

फिर वोह अपने कुत्ते को देखता है …तो उसे लगता है ..की अंग्रेज का डॉगी यह वाहियात हरकत नहीं कर सकता ..फिर भी उसका दिल नहीं मानता ..वोह उस चीज को हाथ से छु कर देखता है ….उसका शक और गहरा हो जाता है ..की यह वाकई में कोई गन्दी चीज है ….

वोह अपने डॉगी को फिर देखता है ..उसे लगता है ..मेने इसे इतनी ट्रेनिंग दी है ..यह भला ऐसी हरकत कैसे कर सकता है? ….

पर उस चीज की बदबू का अहसास उसे मजबूर करता है ….वोह वापस आता है और उस चीज को ऊँगली से लेकर उसका मुआयना करता है और फिर उसे चाट लेता है और उसके बाद निष्कर्ष निकलता है ..की यह वाकई में डॉगी का फू फू है ….

यह कहानी कहने का अभिप्राय यह है ..भारतीय जनता उस अंग्रेज की तरह है …जो इक बार देखने , समझने और झेलने के बाद ही समझते है …की जिसे उन्होंने अपना मसीहा बना कर चुना …वोह झुटा और तिगडमबाज था …उस अंग्रेज ने कम से कम इक बार अपना निष्कर्ष निकाला तो उसपे यह अमल किया की….

उसने अपने डॉगी को पोट्टी बहार करने की ट्रेनिंग दी ….

पर अफ़सोस भारतीय जनता देखने , सूंघने और चखने के बाद फिर किसी नए डॉगी को पाल लेती है और फिर जनता इसी डॉगी की आने वाले कई सालो के लिए घोटालो , भ्रस्ताचार और झूटे वायदों की फू फू की सफाई करती है ….

इस मामले में कम से कम हमारी अनपढ़ या यूँ कहे गावं देहात में रहने वाली जनता ज्यादा समझदार है ..इसलिए वोह डौगी पालने से पहले ही उसका भरपूर इस्तमाल कर लेती है और इक बार गलती करने पे अगली बार सबक भी सीख लेती है …

पर असली अफ़सोस तो इन बुद्धिजीवी शहरी जनता या यूँ कहे काले अंग्रेजो पे आता है ..जो देखने , सूंघने और चखने के बाद भी यह मानने को तैयार नहीं …की उनका डॉगी पोट्टी ट्रेन नहीं है …उसमे भी आम सडक छाप वाले डॉगी के ही गुण है ….

शायद उनका दिल तो सच जानता है ..पर दिमाग उस सच को मानने को तैयार नहीं ….की जिसको उन्होंने पाला है उसकी भी गंदगी उन्हें आने वाले दिनों में साफ़ करनी होगी या यूँ कहे जिस पे उन्होंने दावं लगाया ..उसने उन्हें धोखा दे दिया है …

Kapil Kumar

Awara Masiha

Note: “Opinions expressed are those of the authors, and are not official statements. Resemblance to any person, incident or place is purely coincidental.’ ”



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