Awara Masiha - A Vagabond Angel

एक भटकती आत्मा जिसे तलाश है सच की और प्रेम की ! मरने से पहले जी भरकर जीना चाहता हूं ! मर मर कर न तो कल जिया था, न ही कल जिऊंगा !

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कैसे ?

Posted On: 18 Mar, 2017 कविता में

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किसी के अरमानो की कब्र के ऊपर , नया आशियना बसाऊं कैसे …..

तेरी मांग उजाड़ कर , तुझे अपनी दुल्हन बनाऊं   कैसे ?

कैसे मिलेगी मुझे भी कोई ख़ुशी..
..
दुसरो को रुला कर , खुद को हसाउँ  कैसे ?


अब तो बुझने लगा है मेरी उम्मीदों का भी दीया  …..

दुसरो का घर जला कर ,अपनी दिवाली मनाऊं  कैसे ?

होता बस में मेरे अब तक, खुद को भी मिटा देता …..

तुझे अकेला छोड़कर , इस दुनिया से जाऊं  कैसे ?



थक गई आँखे तेरे इन्तजार में , सांस भी नहीं चलती अब किसी आस में …

इस मुर्दा होते शरीर का बोझ उठाऊं  कैसे ?

दिल है की अब भी मानता ही नहीं ….

इसे अब नये बहानों  से बहलाऊँ  कैसे ?


तुझे भुलाने के लिए , कोशिसे की हजार

आँखों में झोका इस दुनिया का गंद भी कई बार

मन को फुसलाने के लिए , नीचे  गिरा कई बार

फिर भी तेरी मूरत को इस दिल से हटाऊँ  कैसे

तू ही अब बता तुझे मैं  पाऊं   कैसे ?


By

Kapil Kumar

Awara Masiha



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