Awara Masiha - A Vagabond Angel

एक भटकती आत्मा जिसे तलाश है सच की और प्रेम की ! मरने से पहले जी भरकर जीना चाहता हूं ! मर मर कर न तो कल जिया था, न ही कल जिऊंगा !

177 Posts

3 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 25540 postid : 1322994

बस तू ही तू …

Posted On 5 Apr, 2017 कविता में

  • SocialTwist Tell-a-Friend


मेरा राम भी तू, मेरा रहीम भी तू

मेरा अल्लाह भी तू, मेरा भगवान भी तू

मेरा गंगासागर भी तू  मेरा हज भी तू

मेरा सज़दा  भी तू, मेरी आरती भी तू

मेरा दोज़ख  भी तू, मेरी जन्नत भी तू …..

मेरी मस्जिद भी तू, मेरा मंदिर भी तू

मेरी पूजा भी तू, मेरी इबादत भी तू

मेरी सुबह भी तू, मेरी रात भी तू

मेरी जिंदगी भी तू, मेरी मौत भी तू

मेरी मोहब्बत भी तू, मेरी नफ़रत  भी तू …..

मेरी हिम्मत भी तू, मेरी जरुरत भी तू

मेरी फुर्सत भी तू, मेरी नफरत भी तू

मेरी चाहत भी तू, मेरी अदावत भी तू

मेरी वादी भी तू, मेरी घाटी भी तू

मेरी मंजिल भी तू, मेरी डगर भी तू …

मेरा दिल भी तू, मेरा दर्द भी तू

मेरा गरूर भी तू, मेरा सरूर  भी तू

मेरा दिल भी तू, मेरा दिमाग भी तू

मेरा जूनून भी तू, मेरा फितूर भी तू

मेरा हमसफर भी तू, मेरा कारवां भी तू ….

मेरा सूरज भी तू, मेरा चाँद भी तू

मेरा दिन भी तू, मेरी रात भी तू

मेरा उजाला भी तू, मेरा अँधेरा भी तू

मेरा ईमान भी तू, मेरा अरमान भी तू

मेरा अहसास भी तू, मेरा दुःसाहस  भी तू

मेरा मान भी तू,  मेरा अपमान भी तू ….

तू नहीं तो कुछ नहीं …. इससे ज्यादा किसी की चाहत नहीं …

……..


BY

KAPIL KUMAR

Awara Masiha




Tags:   

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



latest from jagran